अरे इतना सन्नाटा क्यों है भाई ! 100 करोड़ की लागत से बसाई जा रही अवैध कॉलोनी, आखिर हाथ पर हाथ धरे बैठे JDA निगम और विजिलेंस अधिकारी क्यों है मौन! क्या कॉलोनाइजर संग खेला जा रहा फ्रेंडली मैच! दाल में कुछ काला नही, पूरी दाल ही काली है?

अरे इतना सन्नाटा क्यों है भाई ! 100 करोड़ की लागत से बसाई जा रही अवैध कॉलोनी, आखिर हाथ पर हाथ धरे बैठे JDA निगम और विजिलेंस अधिकारी क्यों है मौन! क्या कॉलोनाइजर संग खेला जा रहा फ्रेंडली मैच! दाल में कुछ काला नही, पूरी दाल ही काली है?

 

जालंधर(अमन बग्गा) निगम व जेडीए के अधिकारियों की आंखों में घुल झोंककर कॉलोनाइजर जालंधर में धड़ल्ले से अवैध कॉलोनियों को काट रहे है।

 अब S नाम के कॉलोनाइजर ने अवैध कॉलोनी काट कर रूल एंड रेगुलेशन की धज्जियां उड़ा डाली है।
हालांकि कई अवैध कॉलोनियों को काटने वाले कई कॉलोनाइजरों के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है। लेकिन S नाम के कॉलोनाइजर बेख़ौफ़ अवैध कॉलोनियां काट रहा है।

100 करोड़ में बिकेंगे अवैध कॉलोनी में 70 विला : सूत्र

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पॉश एरिया में तैयार की जा रही इस कॉलोनी में तकरीबन डेढ़ करोड़ की कीमत के 70 आलीशान विला बनाकर बेचेंगे जाएंगे। जिस की कुल कीमत 100 करोड़ से पार बताई जा रही है। यह भी बात सामने आ रही है कि इस सारे काम मे अधिक्तर पैसा 2 नम्बर का लगाया जा रहा है।  

वही जब हमने अधिकारियों से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जल्द से जल्द अवैध कॉलोनी को ध्वस्त किया जाएगा।

अब देखना यह दिलचस्प होगा कि विभागकी तरफ से अवैध कॉलोनी को तहसनहस करने के लिए पीला पंजा पहुंचता है या नही, और कब तक कॉलोनाइजर पर FIR दर्ज होगी।

विजिलेंस और JDA व निगम अधिकारी क्या कॉलोनाइजर के साथ खेल रहे फ्रेंडली मैच 

जल्द ही PLN न्यूज़ खुलासा करेगा कि जेडीए व निगम के किन अधिकारियों की छत्र छाया और संरक्षण की बदौलत शहर कॉलोनी में अवैध कॉलोनियां बन रही है।

बड़ा सवाल यह है कि आखिर अवैध कॉलोनी पर इतना रहम क्यों किया जा रहा है। आखिर इस के पीछे जेडीए व निगम के अधिकारियों की नालायकी है या फिर कोई रिश्वतख़ोरी का खेल चल रहा है।

वही दूसरी और विजिलेंस अधिकारियों को जेडीए व निगम के अधिकारी और ब्लैक मनी से कॉलोनियां काटने वाले कॉलोनाइजर नजर क्यों नही आते । उन्हें भी जांच करनी चाहिए कि इस अवैध कॉलोनी को काटने के लिए किन अधिकारियों की जेबों में गुलाबी नोट डाले गए है। जो कि उन्हें अवैध कॉलोनी नजर आनी बन्द हो गयी है। और आखिर 100 करोड़ रुपये कॉलोनाइजर के पास कहा से आ गए।

विजिलेंस को जेडीए व निगम अधिकारियों की आय व सम्पति की जांच करनी चाहिए। क्या कुछ दाल में काला है या पूरी दाल ही काली हो चुकी है।

 गौरतलब यह है कि भारी भरकम तनख्वाह लेने वाले विजिलेंस अधिकारियों को अवैध कॉलोनियों की आड़ में हो रही रिश्वतखोरी क्यों नही नजर आ रही।

कही ऐसा तो नही इस पूरे खेल में विजिलेंस के अधिकारी भी मिलकर फ्रेंडली मैच तो नही खेल रहे। PLN न्यूज़ जल्द ही इस पूरे मामले की परतें खोलेगा।