नन लूसी का चौंका देने वाला खुलासा, कहा- बिशप और पादरियों के कारनामों के बारे में जानकर भी सब चुप हैं









वायनाडः फ्रांसिस क्लरिस्ट कांग्रेगेशन (एफसीसी) द्वारा तीन महीने पहले कथित अनुशासनहीनता के आरोप में निकाली गई नन सिस्टर लूसी कालापुरा ने अपनी आत्मकथा में बताया कि कॉन्वेंट-पाठशालाओं में यौन शोषण एवं यौन उत्पीड़न बहुत आम है। वह कहती हैं कि इस बारे में हर कोई जानता तो है लेकिन फिर भी सब चुप रहते हैं।

सिस्टर लूसी ने कहा कि उनकी जीवनी, जिसका शीर्षक ‘कर्थाविंते नामथिल’ (परमेश्वर के नाम में) है, में उन्होंने पादरियों और बिशप्स द्वारा यौन उत्पीड़न का भी जिक्र किया है। इस पुस्तक में सिस्टर लूसी ने कैथोलिक चर्च में कई संस्थागत सुधारों की मांग की है। अपनी पुस्तक में गंभीर आरोप लगाते हुए सिस्टर ने खुलासा किया कि अपने 35 साल के कॉन्वेंट करियर में कम से कम चार बार उन्हें यौन उत्पीड़न के प्रयासों का सामना किया। सिस्टर लूसी ने कहा, यह सब कॉन्वेंट के मेरे जीवन के बारे में है। यह मेरे संस्मरणों का संग्रह है। यह एक कल्पना नहीं, कटु सत्य है। मेरी इच्छा है कि चर्च के अधिकारी सड़ांध को मिटाने के लिए इनमें से कुछ वास्तविकताओं को स्वीकारें। ज्यादातर समय वे ऐसी घटनाओं से इनकार करते रहते हैं और इस विषय को एक कोने में करने की कोशिश करते हैं।

सिस्टर कलापुरा ने कहा कि यदि उनकी किताब चर्च में कुछ अहम सुधार लाने में सफल रही तो उन्हें बहुत खुशी होगी। अपने निष्कासन पर सिस्टर ने कहा बलात्कार के आरोपी जालंधर के बिशप फ्रेंको मुल्लक्कल की गिरफ्तारी की मांग के लिए उन्हें निशाना बनाया गया था। सिस्टर ने लिखा कि कई युवा ननों के साथ पादरियों के आधिकारिक निवास पर यौन शोषण हुआ है। फादर रॉबिन वडकुमचेरी कई नन के साथ अवैध संबंध थे जिनको 2016 में कोट्टियूर (कन्नूर) में एक कम उम्र की लड़की को गर्भवती करने के लिए पोस्को अधिनियम के तहत 20 साल की दोहरी सजा काट रहे हैं। वहीं सिस्टर द्वारा किताब में लिखी हुई बातों पर चर्च अधिकारियों ने इस पुस्तक पर कोई भी बयान देने से मना कर दिया है।



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