DIPS विजय अभियान का एक और पन्ना, DIPS ढिलवां की पूर्व छात्रा और US में सॉफ्टवेयर इंजीनियर अमनदीप कौर ने की स्कूल की तारीफ, बोलीं- इस जैसा कोई स्कूल नहीं

DIPS विजय अभियान का एक और पन्ना, DIPS ढिलवां की पूर्व छात्रा और US में सॉफ्टवेयर इंजीनियर अमनदीप कौर ने की स्कूल की तारीफ, बोलीं- इस जैसा कोई स्कूल नहीं

 

जालंधर (अमन बग्गा): डिप्स के विजय अभियान के पन्नों में अपनी कामयाबी के पन्ने को जोड़ते हुए कैलिफोर्नियां में अडोब कंपनी की साफ्टवेयर इंजीनियर व डिप्स ढिलवां की पूर्व छात्रा अमनदीप कौर ने कहा डिप्स जैसा स्कूल कहीं नही है। केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि छात्रों को ऑलराऊडर बनाने के लिए हर प्रयास किया जाता है । जो उन्हें हर क्षेत्र के लिए तैयार करते हुए पारंगत करते हैं। यहां के अध्यापक गण,उनके द्वारा प्रदान की गई शिक्षा तथा यहां पर बनाए दोस्त आज भी मेरे साथ है।

 

 

बहु-आयामी शिक्षा का दूसरा नाम डिप्स
अमन ने कहा, विद्यार्थियों के बहु- आयामी विकास में डिप्स जैसा और कोई स्कूल नहीं है। जिसने न केवल हमें शिक्षा प्रदान की, बल्कि हमारे सम्पूर्ण व्यक्त्वि को अग्रसर रखने के लिए एडवांस टैक्नोलॉजी युक्त साईस लैबका,विश्व प्रसिद्ध किताबों से सुसज्जित लाईब्रेरी, विभिन्न खेलों की सुविधाओं से युक्त खेलों के मैदान, नौतिक व सांस्कृतिक शिक्षा से भरपूर शैक्षिक सत्रों का आयोजन करवाया जाता था। हमें पर्यावरण से जोड़े रखने के लिए समय समय पर गाडर्निग की भी जानकारी प्रदान की जाती थी। जिसकी प्रेरणा से आज अमन अपने घर की गाडर्निग स्वंयम करती है। स्कूल में घुड़सवारी का भी प्रबंध था।

 

 

हर क्षेत्र में रही अग्रसर
अमनदीप ने बताया कि स्कूल में उन्होंने 1995 में पांचवीं कक्षा में प्रवेश किया। तथा 12वीं तक की शिक्षा यही से प्राप्त की। उन्हें सब प्यार से अम्मु बुलाते थे। वह शिक्षा के साथ साथ हर क्षेत्र में पारंगत थी। जो कि स्कूल के अध्यापकों की देन थी। वह स्कूल में खो-खो की कैप्टन थी। इसी के साथ वह संगीत तथा डांस में भी सबसे आगे थी। यहां पर करवाई जाने वाली सह-सहायक गतिविधियां तथा प्रतियोगिताएं हमें नए मंच प्रदान करते हुए हम में एक नया जोश भर देती भी। जो हमारे अंदर जीत की भावना को पैदा करते हुए हमारे आत्मविश्वास को भी बढ़ाता था। उसी आत्मविश्वास के बल पर आज अमन यहाँ तक पहुँची है।

 

 

डिप्स मेरा दूसरा घर
अमन ने बताया कि डिप्स उनका दूसरा घर था क्योंकि वह स्कूल के होस्टल में रहती थी। अपने घर से ज्यादा स्कूल से उन्हें अधिक लगाव था। यहां पर सीखी हर बात तथा अध्यापकों की डांट ने उन्हें जीवन में उस मुकाम तक पहुँचाया जहां वह जाना चाहती थी। स्कूल में बने दोस्त अमरजोत संधु, हरप्रीत बल, अमन तथा हरजोत चीमा के साथ बिताए पल उन्हें आज भी याद है । आज भी वह सब एक दूसरे के साथ बीते समय की यादों को ताकाा करते हैं।

 

 

 

डिप्स से बढक़र कोई नही

अमनदीप कौर ने डिप्स चेन के चेयरमैन सरदार गुरबचन सिंह तथा एम.डी तरविंदर सिंह का धन्यवाद करते हुए कहा कि डिप्स से बढक़र उनके लिए कुछ नही क्योंकि उस समय में उन्हें अंर्तराष्ट्रीय स्तर के स्कूल की सुविधाए मुहैया करवाई डिप्स ने। जो हम सपनों में सोचते थे वैसा स्कूल हमें गांव में मुहैया करवाया। उन्होंने कहा कि वह सदा यही चाहती है कि डिप्स सदैव विद्यार्थियों के लिए सर्वपक्षिय विकास की बगिया बना रहे।

 

 

🗣️शुगर कंट्रोल के लिए रोज लगवाने पड़ते थे 4 टीके. सुनिए कैसे “एकनायकम” जड़ी बूटी से बनी “i-Coffee” ने दिलाया शुगर की भयंकर बीमारी से छुटकारा

◆Video देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें👇👇